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Ajay Pratap Singh

बासमती चांवल को जीआई टैग के लिए कमेटी का पुनर्गठन नैसर्गिक न्याय की दृष्टि से आवश्यक: सिंह

भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री और सांसद श्री अजय प्रताप सिंह ने कहा कि आजादी के बाद खाद्यान्न उत्पादन में पंजाब और हरियाणा देश का पोषण करने का दावा करते आये हैं। इस दावे को मध्यप्रदेश ने उत्पादन और उत्पादकता का कीर्तिमान बनाकर बेदम कर दिया है। इसी तरह मध्यप्रदेश में उत्पादित परम्परागत बासमती चांवल की स्पर्धा में पंजाब प्रमुखता से शामिल है और मध्यप्रदेश को बासमती का जीआई टेग देने में पंजाब और एपीडा ने विरोधात्मक भूमिका का निर्यात कर मध्यप्रदेश को जीआई टेग से वंचित रखा है, जिसके विरोध में मध्यप्रदेश ने चेन्नई उच्च न्यायालय से स्थगत हासिल कर जीआई टैग का हक दिये जाने की मांग की है। केंद्रीय स्तर पर इसके लिये नौ सदस्यीय हाई पाॅवर कमेटी का गठन तो किया गया लेकिन कमेटी में पंजाब के कुलपति और एपीडा के अध्यक्ष को प्रमुख सदस्य बनाकर नैसर्गिक न्याय की अवहेलना की है।

उन्होंने मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चैहान द्वारा केंद्रीय कृषि मंत्री और उद्योग मंत्री को प्रस्तुत याचिका में स्पष्ट कहा है कि जो सदस्य बासमती उत्पादन स्पर्धा में मध्यप्रदेश के प्रतिस्पर्धी है उन्हें कमेटी में न्यायदान का कार्य सौपना उचित नहीं है। न्याय और नैतिकता की दृष्टि से नई स्पर्धी को सदस्य बनाना अनुचित रहेगा, उन्हें समिति से बाहर किया जाये।

श्री सिंह ने कहा कि विदेशों को निर्यात किया जा रहा भारतीय बासमती चांवल में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी मध्यप्रदेश की होती है। लेकिन जीआई टैग न होने से प्रदेश के किसान को निर्यात मूल्य नहीं मिलता। दूसरे राज्यों के निर्यातक इसमें खेल करते हैं और नहीं चाहते कि मध्यप्रदेश को जीआई टेग मिले। मध्यप्रदेश को जीआई टेग मिलने से इनका आर्थिक नुकसान होगा। श्री सिंह ने केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह और उद्योगमंत्री श्री सुरेश प्रभु से आग्रह किया है कि हाई पाॅवर कमेटी का तत्काल पुनर्गठन कर जल्दी से जल्दी रिपोर्ट प्राप्त की जाये जिससे मध्यप्रदेश के किसानों के समर्थन में न्याय मिल सके और जीआई टेग का हक पाने से मध्यप्रदेश बासमती उत्पादन का महत्वाकंाक्षी लक्ष्य जोशखरोश के साथ पूरा कर सके।

राष्ट्रीय हित में इस मामले का तत्काल निराकरण किया जाना हित में है। श्री नरेंद्र मोदी ने 2022 तक किसान की आय दोगुना करने का लक्ष्य रखा है और इसमें बासमती उत्पादन का महत्वपूर्ण योगदान होगा।

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