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भारत सरकार की भावना के अनुसार प्रदेश के मछुआ जल कृषकों को पात्रता मिलेगी मछुआ न्यायालय की स्थापना से न्याय सुनिश्चित होगाः मछुआ प्रकोष्ठ

भोपाल। भारतीय जनता पार्टी मछुआ प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक श्री बाबूलाल चैहान ने कहा कि भारत सरकार ने मछुआरों को जल कृषक परिभाषित किया है। किंतु मछुओं को कृषक की सुविधाएं नसीब नहीं हो रही हैं। इस संबंध में मछुआ प्रकोष्ठ ने प्रदेश में मछुआरों को जल कृषक का दर्जा देकर उन्हें किसानों के समकक्ष कर्ज, वित्तीय सहायता जैसी सुविधाएं प्रदान करने का शासन से आग्रह किया है। मछुआरों को जल कृषक के रूप में परिभाषित किये जाने पर जीरो प्रतिशत ब्याज पर कर्ज की पात्रता मिलेगी। काश्तकारों के समान अन्य सुविधाएं भी मिलेगी।

उन्होंने कहा कि मछुआरों की वित्तीय दशा अत्यंत कमजोर है। उन्हें मत्स्य आखेट के लिए आवश्यक उपकरण, वित्तीय सहायता मिलना टेढी खीर है। बैंकों से सुविधा मिलती। प्रकोष्ठ ने इसके लिए मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विकास विभाग के अंतर्गत एक मछुआ कल्याण कोष की स्थापना पर भी विचार किया गया है। यह कोष 75 करोड़ रू. का होगा और इससे मछुआ की जरूरी आवश्यकताएं पूरी करने के लिए कर्ज दिया जा सकेगा। मछुआ जलाशय लेने, उपकरण खरीदने के लिए कर्ज ले सकेंगे।

श्री चैहान ने कहा कि मत्स्य आखेट के लिए जलाशयों के प्रवर्धन और आवंटन के मामलों के विवाद के निराकरण के लिए मछुआरों को चार स्तरों पर आवेदन और याचिका देना पड़ती है। यह क्रम वर्षों चलता है और जलाशयों का पट्टा 10 वर्ष का होता है। पट्टा की अवधि 10 वर्ष गुजर जाती है और मामले लंबित बना रहता है। इसलिए प्रकोष्ठ का विचार है कि इसके लिए मछुआ न्यायालय की स्थापना की जाये। मछुआ कल्याण बोर्ड ने इन अनुसंशाओं की पुष्टि की है और इन्हें राज्य सरकार के निर्णय हेतु अगे्रषित किया जा चुका है। इन पर सरकार द्वारा निर्णय लिये जाने पर मछुआरों को सामयिक राहत मिलेगी।

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