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ये चुनाव भाजपा की स्पष्टता और कांग्रेस की दुविधा के बीच हैः श्रीमती सुषमा स्वराज

(पत्रकार वार्ता)

जबलपुर में केन्द्रीय मंत्री ने कहा-अपने नेता की छवि को लेकर दुविधा में फंसी कांग्रेस

जबलपुर। मध्यप्रदेश में पिछले तीन बार से लगातार भारतीय जनता पार्टी की सरकार बन रही है। चौथी बार भी जनता का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए हम चुनाव मैदान में उतरे हैं। मध्यप्रदेश का ये चुनाव और 2019 को लोकसभा चुनाव भाजपा की स्पष्टता और कांग्रेस की दुविधा के बीच होगा। यह बात केन्द्रीय विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज ने सोमवार को जबलपुर में मीडिया से चर्चा के दौरान कही।

कांग्रेस दुविधाग्रस्त पार्टी है

कांग्रेस आज देश की ऐसी पार्टी है, जो अनेक दुविधाओं से घिरी है। अन्य पार्टियों से गठबंधन कैसे किया जाये, यदि गठबंधन हो गया तो राहुल गांधी साथी दलों को नेता के रूप मे कैसे स्वीकार होंगे, जैसी दुविधाओं में घिरी हुई है कांग्रेस। यदि इन बातों को छोड़ भी दें तो सबसे बड़ी दुविधा उनके नेता की छवि को लेकर है। कांग्रेस के नेता इस दुविधा में हैं कि राहुल गांधी को किस रूप में प्रोजेक्ट किया जाये। वर्षों तक कांग्रेस ने राहुल गांधी को एक धर्मनिरपेक्ष नेता के रूप में प्रस्तुत किया। फिर उन्हें लगा कि हिन्दू देश में बहुसंख्यक हैं, तो उन्होंने उनकी छवि हिन्दू नेता के रूप में बनाने पर विचार किया। राहुल गांधी ने संसद के पटल पर भी बोलते हुए कहा कि मैं हिंन्दू हूँ। इस पर भी बात नहीं बनी तो उन्हें लगा कि आस्थावान हिन्दू की छवि बनाना चाहिये,तो उन्होंने कैलाश मानसरोवर की यात्रा की, शिवमंदिरों में पूजा की और शिवभक्त की छवि बनाई। राहुल जी जब मध्यप्रदेश आये तो यहां लगा कि महाकाल के साथ पीताम्बरा पीठ की भी मान्यता है, तो वहां भी गए। वह शैव भी बने और शाक्य भी बन गये। फिर लगा कि हिन्दू तो बन गये पर उसमें किस जाति के बनें- दलित या सवर्ण। इन सब के बाद भी उन्हें लगा कि दूसरा वोट बैंक न खिसक जाये, तो आरएसएस की आलोचना करने लगे। इतनी सारी दुविधा इतने पुराने संगठन को अपने अध्यक्ष को लेकर है।

देश जाति-धर्म को नहीं देखता, राहुल क्यों दुविधा में हैं

श्रीमती स्वराज ने कहा कि चुनावों के समय राहुल जी को यह रूप बदलने की क्यों पड़ी है। वे जो हैं, वही बने रहें। यह देश सर्वधर्म समभाव वाला देश है। इसने हर धर्म के लोगों को सर्वोच्च पद पर बैठाया है। संविधान के अनुसार देश का सर्वोच्च पद राष्ट्रपति का है जिस पर हिन्दू, मुस्लिम, सिख, सवर्ण और दलित भी आसीन हुए हैं। इसी तरह न्यायपालिका में भी उच्च न्यायाधीश के पद पर हिन्दू, मुस्लिम, सिख और पारसी भी बैठे। देश की तीनों सेनाओं में विभिन्न धर्मों के व्यक्ति प्रमुख बने। यह देश सबको स्वीकारता है, यह जाति मजहब को नहीं देखता, तो आप जो हो वही बने रहो। क्यों दुविधा पाल रखी है ?

भाजपा का नेतृत्व और नीति स्पष्ट है

केंद्रीय मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज ने कहा कि हमारा नेतृत्व तय है, हमारी नीतियां स्पष्ट हैं और हमारे कार्यक्रम सबके सामने हैं। केन्द्र में हमारे नेता प्रधानमंत्री मोदी जी और प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज जी हैं। चुनावों में भी यही हमारे प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं। जहां तक जाति और मजहब की बात है, तो मोदी जी ने एक ही मंत्र से सब कुछ स्पष्ट कर दिया है और वह है सबका साथ-सबका विकास। इस वाक्य के अंदर सब कुछ समाहित है। सबका साथ में सभी जातियां, धर्म, मजहब आ जाते हैं। मोदी जी जब भी बात करते हैं तो 121 करोड़ भारतीयों की बात करते हैं।

15 वर्ष बाद भी मोहभंग जैसी कोई बात नहीं

श्रीमती स्वराज ने मध्यप्रदेश के संदर्भ में कहा कि जरूरी नहीं है कि 10 या 15 वर्षों तक सरकार रहे तो उससे मोहभंग होगा। मोहभंग तब होता है, जब नेतृत्व में कमी हो, नीतियां जनविरोधी हों, योजनाएं कार्यरूप में परिणित न हों, या सामने प्रभावशाली विकल्प हो। मध्यप्रदेश में हमारा नेतृत्व यशस्वी है, परिश्रमी है, साथ ही नीतियां जनकल्याणकारी हैं और कार्यक्रम बेहद प्रभावी हैं। यहां विपक्ष के पास भी ऐसा नेतृत्व नहीं है, जो प्रभावी हो, क्योंकि मध्यप्रदेश की जनता ने तो जांच परख कर उन्हें नकारा है, और देश में जो विकल्प हैं वह कितना प्रभावी है, ये सब जानते हैं। भाजपा में स्पष्टता है कोई दुविधा नहीं है इसीलिये मप्र की जनता ने भी कोई दुविधा नहीं है और इसी तरह पूर्ववर्ती चुनावों में भी दुविधा नहीं थी इसीलिये मैं कह सकती हूँ कि यहां के वातावरण को देखकर स्पष्ट है कि मप्र में हम चौथी बार सरकार बनायेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा में स्पष्टता है, कोई दुविधा नहीं है। इसीलिये जनता में भी कोई दुविधा नहीं है। इसलिए मैं कह सकती हूँ कि यहां के वातावरण को देखकर स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश में हम चौथी बार सरकार बनायेंगे।

राफेल को जबरन मुद्दा बना रही कांग्रेस

श्रीमती स्वराज ने कहा कि राफेल का मुद्दा कांग्रेस द्वारा झूठ का सहारा लेकर उठाया गया है। कांग्रेस एक ऐसे विषय को मुद्दा बना रही है, जो नॉन इश्यू है। फिर भी वह मुद्दा बन नहीं पाया, क्योंकि उसमें सच्चाई नहीं है। राफेल को जिस कीमत पर खरीदा गया है, वह यूपीए सरकार के समय तय की गई कीमत से 9 प्रतिशत कम है।

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