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06-01-2017_02_51_20nanad_kumar

सांस्कृतिक नवोत्थान की देश में अनूठी, विलक्षण पहल- नंदकुमार सिंह चौहान 

भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष, सांसद श्री नंदकुमार सिंह चौहान ने कहा कि भारतीय संस्कृति ने विश्व मानवता को विश्व बंधुत्व का संदेश दिया। जहॉ धर्म प्रधान अन्य संस्कृतियां अलगाववाद का संकेत देती है। भारतीय संस्कृति ने साबित किया है कि सांस्कृतिक जागरण जोड़ने की विधा है तकरार और वैमनस्य पैदा करने की नहीं। ऐसे में मध्यप्रदेश ने अपने सांस्कृतिक गौरव के अनूकूल सांस्कृतिक एकता न्यास का गठन करने और वेदांत की शिक्षा का प्रसार-प्रचार करने की दिशा में सक्रियता जताकर सांस्कृतिक नवोत्थान की ऐसी विलक्षण पहल की है जिसका सुखद परिणाम मिलेगा। चौहान ने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को बधाई दी है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि आदि शंकराचार्य के दर्शन और वेदांत शिक्षा के प्रसार की गतिविधियां संत समाज के मार्गदर्शन में संचालित करने का उपक्रम शासन आरंभ करेगा।
श्री नंदकुमार सिंह चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश की जीवन रेखा नर्मदा की सेवा यात्रा के दौरान प्रदेश भर में मनाये गये आदिशंकराचार्य प्रकटोत्सव के पावन अवसर पर संत गुरूओं ने मध्यप्रदेश की पुनीत धरा का विशेष महत्व निरूपित किया है। इस परिप्रेक्ष्य में मुख्यमंत्री की घोषणा मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक समृद्धि का आईना सिद्ध होगी। आदि श्ंाकराचार्य ने नर्मदा तट पर औंकारेश्वर स्थित गुफा में तपस्या की और अद्वैत दर्शन का बोध प्राप्त किया। मध्यप्रदेश में ही बाल श्रीकृष्ण ने सांदीपनी आश्रम में गुरू शिष्य परम्परा का संवर्धन किया। मध्यप्रदेश की बुंदेलखंड की धरती पर जहां वीर छत्रसाल जैसे पराक्रमी वीर हुए वहीं मंदाकनी के तट पर मर्यादा पुरूषोत्तम राम ने वनवास की ओर अग्रसर होते हुए भरत को राजा की मर्यादा का बोध कराया था। स्वाभाविक रूप से नर्मदा सेवा यात्रा इस संस्कृति प्रधान प्रदेश में सांस्कृतिक संवर्धन, पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अल्प किंतु ऐतिहासिक प्रयास सिद्ध हो चुका है जिसकी विश्वव्यापी सराहना हुई है।
श्री नंदकुमार सिंह चौहान ने आदि शंकराचार्य के सांस्कृतिक योगदान को पाठ्यक्रम में शामिल किये जाने को स्तुत्य प्रयास बताया और कहा कि वेदान्त दर्शन मानव विकृतियों का दमन करने और विश्व बंधुत्व के विस्तार का मार्ग है जिस पर चल कर मानव क्लेश परस्पर द्वन्द की संभावनाओं को समाप्त करने में इनकी सीख सक्षम है। सांस्कृतिक समृद्धि के यही प्रमाण भारत के विश्व गुरू होने के प्रमाण है। जब भारत में वेदों की रचना हो रही थी विश्व की अन्य संस्कृतियां शैशव में थी। सांस्कृतिक नवोत्थान का यह प्रयास भारतीय सांस्कृतिक एकता का सशक्तीकरण करने में मील का पत्थर साबित होगी।

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